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मन कोई बर्तन नही है

मन कोई बर्तन नही है जिसे भरा जा सके       बल्कि एक ज्वाला है जिसे प्रज्जवलित किया जाना चाहिए .... दार्शनिक प्लुटो का यह कथन “ मन कोई बर्तन नही है जिसे भरा जा सके बल्कि एक ज्वाला है जिसे प्रज्जवलित किया जाना चाहिए ” , अगर देखे तो यह मात्र कुछ शब्द हैं मगर इसके अर्थ का व्याख्या करे तो इसमें सारी समस्याओं के समाधान का मार्ग दिखाता है।                    मन जो सबसे तेज है एक क्षण वह धरती के गहराई में है तो दूसरे क्षण आसमान के उंचाईयों पर विराजमान है ।कभी वह धरती के एक क्षोर पर है तो अगले क्षण दूसरे क्षोर पर ।इसका कोई दायरा नही है कोई सीमा नही है यह तो अथाह है अन्नत है ।यह कोई बर्तन नही है जिसे भरा जा सके , यह तो ब्रह्माण्ड के जैसा असीम है ।कभी मन प्रसन्न है तो कभी उदास ,कभी हिमालय के जैसा मजबूत है तो कभी उदास कभी बालू के भीत के जैसा कमजोर । इसमें ईषर्या है द्वेष है उदासी है खुशी है प्रेम है घृणा है लोभ है । यह मन ही तो है तो जो संसार को चला रहा है ।इसमें अन्नत शक्ति है । य...

हमें आईना दिखता राम जेठमलानी को रवीश कुमार की खुली चिट्ठी .

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भारतीय समाज में अक्सर सफल व्यक्तियों का अनुकरण करने की प्रथा रही है ... सिर्फ सफल हो जाना ही उसके व्यक्तित्व को आकर्षक बना देता है... लोग आंख पे पट्टी बांधे उसके हर एक काम का अनुकरण करने लगते हैं..चाहे वो न्यूटन हो  ,  आंइसटीन हो  , शेक्सपीयर हो  ,  विवेकानंद हो    या फिर कोई और   । हम सब का अनुकरण कर लेते है .. हम अनुकरण करने में सबसे आगे हैं.. कहा जाए तो भारत कृषि प्रधान देश नही अनुकरण प्रधान देश है...ब्रिटिश आए तो हमने उनका अनुकरण कर लिया ... उनकी वेश-भूषा , उनकी भाषा , उनका रहन-सहन , उनकी जीवन शैली.. उनके जैसा व्यवहार यहां तक की हमने उनकी गालियां भी सीख ली ... कोई क्या है .. कितना अच्छा बोल रहा है .. कैसा विचार है .. इस बात से हम भारतीय को कोई असर नही पड़ता .. हम केवल इस बात को महत्व देते हैं कि व्यक्ति कितना सफल है .. उसकी ब्रांड वैल्यु कितना है ... इस समय की बात करें तो हर बच्चे..किशोर..युवक.. यहां तक आधे युवक आधे प्रौढ़ भी सार्वभौमिक तौर पर .. सुपर स्टार सलमान खान का फैन है .. हो भी क्यों न .. भाई की एक फिल्म क्या आई बॉक्स ऑफिस पे छप्पर फ...

एक था गीतकार

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                                एक था गीतकार                                                                      -   सुधाकर रवि फि ल्म ‘ गाइड ’ के गाने बनाये जा रहे थे । फिल्म के गीतकार थे हसरत जयपुरी और संगीतकार थे सचिन देव बर्मन । गाने बनाने के क्रम में सचिन देव बर्मन को गीत के कुछ शब्द ठीक नही लगे सो उन्होने हसरत जयपुरी को शब्द बदलने को कहा । हसरत साहब को यह नागवार जुगरा वे शब्द ना बदलने पर अड़ गए । बहस बढ़ता गया , अन्त में हसरत जयपुरी ने गीतकार होने का स्वाभिमान का परिचय देते हुए देव आनन्द की महत्वकांक्षी फिल्म ‘ गाइड ’ छोड़ दी ।                                ...

लघु प्रेम कथा (लप्रेक) | मार्क्स और प्रेम

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लघु प्रेम कथा (लप्रेक)             मार्क्स और प्रेम ईश्वर में विश्वास नही था फिर भी , रोज सुबह ही मंदिर पहुँच जाता वह   ।   इंतजार करता मंदिर की सिढ़ियों पर उसके आने का , आते ही चमक आ जाती उसके चेहरे पर , फिर साथ - साथ चढ़ते दोनों सिढ़ियाँ ।   आंखें मूंद ,   हाथ जोड़ पूरे भक्ति भाव से करती प्रार्थना मंदिर में स्थापित देवता से । और वह मंदिर के एक कोने में खड़ा हो , अपलक निहारता उस इंसान को जिसमें समाहित है उसकी आस्था । अभी उसके पॉकेट में हाथ डालो तो निकल आंएगे मार्क्स के दो - चार विचार । भले ही उसने चाट रखें हो मार्क्सवाद के पन्ने - पन्ने को पर वह भी नही जानता कि किस विचारधारा ने ले रखा है उसे इस वक्त आगोश में  ।                                                           दैनिक ...

लघु प्रेम कथा (लप्रेक) | मारे गए गुलफाम

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लघु प्रेम कथा (लप्रेक)                                मारे गए गुलफाम बैलों को हांकता हुआ हिरामन अपनी तीसरी कसम खा रहा है की कम्पनी की औरत को फिर कभी अपनी गाड़ी में नही बैठाएंगा । और गुनगुनाता हुआ घर की तरफ निकल पड़ता है ‘ अजी हाँ , मारे गए गुलफाम ... . ’ । कहानी एक बार फिर समाप्त हो जाती है और आंखे मूंद समर फिर बेतरतीब तरीके से पड़ जाता है बेड पर । पिछले हफ्ते की ही बात है , छोटी सी बात को लेकर झगड़ा हो गया था उसके साथ । झगड़ा इस कदर बढ़ गया की उसने ब्रेकअप कर लिया था समर के साथ । इसने भी तैश में आकर निकाल दी थी सारी भड़ास उसके सामने ही । कह दिया था कि फिर नही देखेगा सूरत कभी उसकी । कहने को तो कह दिया पर वह भी जानता था कि उसे भूलाना उसके लिए संभव नही , पर क्या करें खा चुका है कसम । तब से मायूस सा पड़ा ये पढ़ता रहता है एक ही कहानी ‘ मारे गए गुलफाम उर्फ तीसरी कसम ’ । बीसियों बार पड़ चुका है एक ही कहनी , हर बार कहानी के अंत होते ही बंधता जाता है अपने ही जुबां के बंधन में । पर अब और नही , निकलना होगा ...

Ishq mein shahar hona - Ravish kumar

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Snap of  Ravish Kumar's book Ishq mein shahar hona बहुत अर्से बाद ऐसी कोई किताब आई है हिन्दी साहित्य में जिसका चर्चा फेसबुक , ब्लॉग , साहित्यिक मंडली में इस कदर हो रहा है, कल तक पुस्तक मेलों से अंग्रेजी की किताब को दिखा कर और हिन्दी की किताब को छुपा कर लाने वाले हम-सब super journalist Ravish Kumar रवीश कुमार /विक्रम नायक की लप्रेक - फ़ेसबुक फ़िक्शन श्रृंखला किताब Ishq mein shaher hona / इश़्क में शह़र होना बड़े ही गर्व से खरीद रहे हैं साथ ही साथ किताब की तस्वीर और इस पर अपनी प्रतिक्रिया फे़सबुक पर डाल रहे हैं । इस किता ब की कितनी प्रतियां बिकी यह तो मुझे नही मालूम पर लोगों के बीच इस किताब को लेकर क्रेज से यह ज्ञात होता है कि यह किताब हिन्दी के लिए एक turning point जरुर साबित होगी । रवीश के इन छोटी कहानियां / विक्रम नायक के चित्रों का प्रभाव है या Rajkamal Prakashan Group के व्यापक प्रचार का पर जो भी है इन सबने मिल कर outdated पड़े हिन्दी को update ही किया है । इन सबने साबित कर दिया कि लेखक खुद को प्रसांगिक रख कर किताब लिखें और उसका जबरदस्त branding हो तो हि...