Posts

Showing posts with the label article

पटना पुस्तक मेला | फर्स्ट डे

Image
कल का पुस्तक मेला मेरे लिया काफी यादगार रहा . क्यों कि मैं पहली बार किसी पुस्तक मेला में शरीक हो रहा था . संयोग से पुस्तक मेले में हिंदी फिल्म गीतकार राज शेखर भी बच्चों के कविता कार्यशाला में आये हुए थे . सो उनसे भी मुलकात हो गयी . बड़े दिनों से उनके तनु वेड्स मनु और तनु वेड्स मनु रिटर्न्स के सारे शानदार गाने सुनता आ रहा हूँ . राज शेखर हिंदी फिल्मों के जितने बड़े गीतकार हैं उतनी ही दखल हिंदी साहित्य में भी रखते हैं और उनका मानना भी है की फिल्म गीत साहित्य से इतर है भी नहीं. पटना पुस्तक मेला में कविता के बहाने बच्चों से रूबरू होते गीतकार राजशेखर @rajshekharis pic.twitter.com/l2ZIv30U5Z — Sudhakar Ravi (@TheSudhakarRavi) February 5, 2017 राज शेखर बताते हैं कि कविता लिखने का शौक उन्हें चौथी क्लास से ही लगी. 11 th और 12 th में जब वे मधेपुरा से पटना पढ़ने आये तो उन्हें मैथ्स से बड़ा डर लगता . मैथ्स का क्लास उन्हें बोझिल मन से पढ़ना पड़ता . सो उनका ज्यादा वक़्त पटना कॉलेज और पटना यूनिवर्सिटी के सामने वाली किताबों के दुकानों में किताब उलटे गुज़रता . ग्रेजुएशन में दिल्ली यूनिवर्सिटी चले गये हिंदी...

अगर अंदर संवेदना होगी तो नींद नहीं आएगी. हैशटैग बंगलौर , हैशटैग दुनिया

Image
दुनिया का सबसे खतरनाक हथियार क्या है ? जिसके एक बार चल जाने के बाद पूरा का पूरा इलाका में सन्न रह जाये ? आप कहेंगे कि एटम बम या फिर हाइड्रोजन बम. तो साहब आज तक आप भ्रम में हैं. इन सब से भी एक खतरनाक हथियार है. सौभाग्यवश उस हथियार का खजाना है भारत के पास. सभ्यता और संस्कृति का हथियार. कहीं एक बार एटम बम चल जाए तो आदमी मर जाएगा है , आने वाली पीढ़ी अपंग पैदा होगी. लेकिन उनका विचार नष्ट नहीं हो जायेगा , सोच रहेगा , प्रतिरोध रहेगा. लेकिन मियां एक बार सभ्यता और संस्कृति का हथियार चल गया तो सारी जिरह बंद , सारे तर्क कूड़ेदान में . आप कहेंगे कि उस लड़की के साथ गलत हो गया. जवाब आएगा कि जरुर उसने भारतीय संस्कृति का पालन न किया होगा .                                                 साल के पहले दिन ही बेंगलुरु के सड़कों पर नए साल का जश्न मानती लड़कियों के साथ दुर्व्यवहार बड़े स्तर पर होता है. शहर के जगह-जगह पर लड़कियों के साथ अभद्र व्यवहार की जाने की खबर और सीसीटीवी विडियो आते हैं. शर्म ...

धधके करेजवा में आगि रे बिदेसिया

Image
           प्रेमचंद   अपने कहानी बलिदान में लिखते हैं कि ‘मनुष्य की आर्थिक अवस्था का सबसे ज्यादा असर उनके नाम पर पड़ता है’. यह बात हमें बेहतर ढंग से समझ आती है जब हम बिदेसिया शैली के नाटकों को देखते हैं. बिदेसी, घिचोर, गड़बड़ी , उपद्दर , उदवास , चपाटराम जैसे नाम बस महज नाम नही है ये अपने साथ अपने पात्रों के सामाजिक और आर्थिक स्थिति भी बताते हैं . प्रेमचंद का यह कथन बिदेसिया के सृजनकर्ता भिखारी ठाकुर पर भी प्रतिबिम्बित होता है. भिखारी शब्द एक साथ उनके आर्थिक , सामाजिक पिछड़ेपन को बताता है . भिखारी ठाकुर अपने उम्र के पहले तीस वर्ष नाई का काम करते रहे और बाकि के उम्र मंच पर जीवन का नचनिया बन कर. वे आम आदमी के कवि भी थे और उनके पीड़ा के गायक भी.  भिखारी ठाकुर की आवाज पिछले शताब्दी के तीसरी दशक से गुंजनी शुरू हुई . यह समय था ब्रिटिश इंडिया का . इसी समय बिदेसिया , गड़बड़-घिचोर , बेटी बेचवा , भाई विरोध सरीखे नाटक सृजन हो रहे थे. ब्रिटिश काल होने के बावजूद इन नाटकों में ब्रिटिश विरोध के बजाए सामाजिक और पारिवारिक समस्या थी, विदेशी वस्तु के बहिष्कार के जगह बेमल...

अगर आप प्रेम में हैं तो मत देखिए सैराट

Image
अगर आप प्रेम में हैं तो मत देखिए सैराट । अगर आपने यह फिल्म देख लेंगे तो हो सकता है कि आप बीमार , बहुत बीमार हो जाएँ । या ये भी हो सकता है कि आपका दिल , दिमाग काम ना करें । आप डिप्रेशन में जा सकते हैं । एक भयानक डर आपके अन्दर घर कर सकता है । शायद कुछ पल आप किसी से बात करने की स्थिति में भी ना रहें । या अगर आप मेरी तरह प्रेम में न है तो फिल्म देखने पर हो सकता है आपका मन एक कोने में जा फूट-फूट कर रोने को करें । रोते रोते आपकी आँखे लाल हो सकती है । गला फंस सकता है । आवाज भारी हो जायेगा ।                                                                        इस साल के शुरुआत में रिलीज हुई मराठी फिल्म है सैराट । लेकिन यकीन मानिये ज़रा सा भी आपको नहीं लगेगा की फिल्म हिंदी की नहीं है । फिल्म की  कहानी   हम सब को पता है । एक गरीब, लोअर कास्ट लड़का और एक अमीर , अप्पर कास्ट लड़की । दोनों का प्यार । फिर परिवार का झ...

चन्द्रगुप्त नाटक के स्मरणीय कथन

Image

चन्द्रगुप्त नाटक में गीति काव्य योजना

Image
हिंदी साहित्य में नाटक विधा का प्रवर्तक भारतेंदु हरिश्चंद्र को माना जाता है . भारतेंदु   के बाद हिंदी नाटक को नए आयाम , नए रूप देने वालों नाटककारों में जयशंकर प्रसाद सबसे अग्रिणी है . कविता, कहानी के इतर प्रसाद ने कई ऐतिहासिक और समसामयिक नाटक का रचना किये हैं . स्कन्दगुप्त , ध्रुवस्वामिनी के अलावे उनका अन्य लोकप्रिय नाटक है चन्द्रगुप्त . सम्राट चन्द्रगुप्त मौर्य के तक्षशिला में शिक्षा प्राप्त करने से लेकर से मगध सम्राट बनने तक का कथा . विदेशी सिकंदर से देश को बचाने की कथा .                                       नाटक को रुचिकर और प्र भावशाली बनाने के लिए जयशंकर प्रसाद गीत  का उपयोग करते हैं . नाटक में कुल ११ गीत हैं . कुछ गीत प्रेम के हैं तो कुछ देश प्रेम के . इस नाटक के सभी गीतों में से दो गीत काफी लोकप्रिय रहे हैं . जिनका इस्तेमाल अन्यत्र भी किया जाता रहा है . प्रथम गीत है ‘अरुण यह मधुमय देश हम...

किसान से मजदूर बनता होरी आज भी जिंदा है

Image
कानून और न्याय उसके पास है जिसके पास पैसा है। कानून तो है कि महाजन किसी असामी के साथ कड़ाई न करे , कोई जमींदार किसी काश्तकार के साथ सख्ती न करे, मगर होता क्या है ? रोज़ ही देखते हो । जमींदार मूसक बंधवाकर पिटवाता है और उसका महाजन लात और जूते से बात करता है । ....कचहरी और अदालत उसी के साथ है जिसके पास पैसा है ।                    यह कथन प्रेमचंद ‘गोदान’ उपन्यास के पात्र झिंगुरी सिंह के माध्यम से कहते हैं । प्रेमचंद का यह कथन दर्शाता है की वे अपने समय व्यवस्था से कितने क्रुद्ध को चुके थे। प्रेमचंद का काल ब्रिटिश इंडिया का काल था, घोर अन्याय का काल, शोषण का काल । पर न्याय, कानून और पैसे का खेल आजाद भारत में भी बदस्तूर कायम है।                    प्रेमचंद को हिंदी साहित्य का पोस्टर बॉय के रूप में जाना जाता है, परन्तु ऐसी स्थिति को देख एक ही सवाल जेहन में अनायास आता है की क्या प्रेमचंद के साहित्य साधना का प्रभाव समाज पर कुछ भी नहीं हुआ ? क्या प्रेमचंद केवल ...

मन कोई बर्तन नही है

मन कोई बर्तन नही है जिसे भरा जा सके       बल्कि एक ज्वाला है जिसे प्रज्जवलित किया जाना चाहिए .... दार्शनिक प्लुटो का यह कथन “ मन कोई बर्तन नही है जिसे भरा जा सके बल्कि एक ज्वाला है जिसे प्रज्जवलित किया जाना चाहिए ” , अगर देखे तो यह मात्र कुछ शब्द हैं मगर इसके अर्थ का व्याख्या करे तो इसमें सारी समस्याओं के समाधान का मार्ग दिखाता है।                    मन जो सबसे तेज है एक क्षण वह धरती के गहराई में है तो दूसरे क्षण आसमान के उंचाईयों पर विराजमान है ।कभी वह धरती के एक क्षोर पर है तो अगले क्षण दूसरे क्षोर पर ।इसका कोई दायरा नही है कोई सीमा नही है यह तो अथाह है अन्नत है ।यह कोई बर्तन नही है जिसे भरा जा सके , यह तो ब्रह्माण्ड के जैसा असीम है ।कभी मन प्रसन्न है तो कभी उदास ,कभी हिमालय के जैसा मजबूत है तो कभी उदास कभी बालू के भीत के जैसा कमजोर । इसमें ईषर्या है द्वेष है उदासी है खुशी है प्रेम है घृणा है लोभ है । यह मन ही तो है तो जो संसार को चला रहा है ।इसमें अन्नत शक्ति है । य...

हमें आईना दिखता राम जेठमलानी को रवीश कुमार की खुली चिट्ठी .

Image
भारतीय समाज में अक्सर सफल व्यक्तियों का अनुकरण करने की प्रथा रही है ... सिर्फ सफल हो जाना ही उसके व्यक्तित्व को आकर्षक बना देता है... लोग आंख पे पट्टी बांधे उसके हर एक काम का अनुकरण करने लगते हैं..चाहे वो न्यूटन हो  ,  आंइसटीन हो  , शेक्सपीयर हो  ,  विवेकानंद हो    या फिर कोई और   । हम सब का अनुकरण कर लेते है .. हम अनुकरण करने में सबसे आगे हैं.. कहा जाए तो भारत कृषि प्रधान देश नही अनुकरण प्रधान देश है...ब्रिटिश आए तो हमने उनका अनुकरण कर लिया ... उनकी वेश-भूषा , उनकी भाषा , उनका रहन-सहन , उनकी जीवन शैली.. उनके जैसा व्यवहार यहां तक की हमने उनकी गालियां भी सीख ली ... कोई क्या है .. कितना अच्छा बोल रहा है .. कैसा विचार है .. इस बात से हम भारतीय को कोई असर नही पड़ता .. हम केवल इस बात को महत्व देते हैं कि व्यक्ति कितना सफल है .. उसकी ब्रांड वैल्यु कितना है ... इस समय की बात करें तो हर बच्चे..किशोर..युवक.. यहां तक आधे युवक आधे प्रौढ़ भी सार्वभौमिक तौर पर .. सुपर स्टार सलमान खान का फैन है .. हो भी क्यों न .. भाई की एक फिल्म क्या आई बॉक्स ऑफिस पे छप्पर फ...