इस मशान पर मुर्दे जलाए जाते नही बल्कि यहां इसांन जीवित होते हैं
इस मशान पर मुर्दे जलाए जाते नही बल्कि यहां इसांन जीवित होते हैं अ भी अभी फ़िल्म ' मसान ' देखा। अनुराग कश्यप की टीम से निकली एक और बेहतरीन फ़िल्म। फ़िल्म इस साल 24 जुलाई को रिलीज हुई थी पर दुर्भाग्यवश अब देख पाया हूँ। एक तो ऐसी फ़िल्म छोटे शहरों में रिलीज नहीं होती दूसरी इन फ़िल्मों को इंटरनेट पे आने में टाइम लग जाता है । हिंदी सिनेमा ख़ास कर के कमर्शियल सिनेमा ( वही फिल्म में जो घटिया होने के बावजूद 100 करोड़ से ज्यादा काम लेती हैं और जिनका मूल मकसद पैसा कमाना होता है ) में प्यार को पैसा कमाने का जरिया माना जाता है । प्यार , इमोशनल , लाइम - लाइट , चकाचौंध , बिना सरपर के गाने का कॉकटेल बना परोस देता है हम दर्शकों के सामने और हम भी बिना कुछ ज़्यादा सोचे समझे दौड़ पड़ते हैं फ़िल्म देखने। बड़े प्रोडक्शन हाऊस और बड़े स्टार के नाम पर कमजोर फिल्में भी हिट हो जाती हैं और अच्छे कहानी वाली शानदार फिल्मों को सिनेमाघर नही मिल पाता है और असफल हो जाती हैं । यह हिंदी सिनेमा ...